भारतीय समाज आर्थिक मानदंडों पर तीन वर्गों में विभाजित है जिन्हें हम अमीर, गरीब और माध्यम वर्ग के नाम से जानते हैं। तीनों वर्गों के पैसे की समझ अलग अलग होती है .
अमीर आदमी अपने पैसों को काम पर लगाते है , उनसे काम करवाते है, उनका पैसा बोलता है. वे अमीर कहलाते हैं ।
गरीब आदमी के पास पैसा ही नहीं होता है, इसलिए न वे बोलते हैं और न ही उनका पैसा बोलता है।
माध्यम वर्ग के पास जो थोडा पैसा होता है उसे वह डरते डरते काम पर लगाता है और उनसे डर डर कर काम करवाता है इसलिए उनका पैसा बाई चांस ही बोलता है।
इन तीनों वर्गों की पैसों के प्रति अपनी अपनी समझ होती है . गरीब और माध्यम वर्ग का व्यक्ति पैसे के प्रति अपनी समझ विकसित कर खुद को ऊपर उठा सकता है ।
पैसे की यह समझ सिर्फ और सिर्फ सीखने पर ही आ सकती है . सीखने के लिए ब्रह्माण्ड ने आपको अनेकों साधन प्रदान किये हैं . जिनमे हमर यह ब्लॉग भी शामिल है . हम भी अभी सीख ही रहे हैं . सीखने की कोई सीमा नहीं होती . तो आइये साथ मिलकर सीखते हैं .
तो आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग में…..


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